ज्ञानी जैल सिंह ने हमेशा अंग्रेजी हुकूमत एवं सामंतवादी ताकतों का हमेशा विरोध किया-शिवमोहन

आजमगढ़। लोक जनशक्ति पार्टी पिछड़ा एवं अति पिछड़ा प्रकोष्ठ द्वारा महामहिम पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह साहब का 105 वां  जयंती का कार्यक्रम कलेक्ट्री कचहरी स्थित पार्टी कार्यालय आजमगढ़ पर संपन्न हुआ कार्यक्रम की अध्यक्षता योगेश विश्वकर्मा प्रदेश महासचिव पिछड़ा वर्ग संचालन राजाराम  मौर्य ने किया कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रदेश अध्यक्ष शिवमोहन शिल्पकार कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए महामहिम के चित्र पर पुष्प अर्पित करते हुए दीप प्रज्वलित किया और कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री शिल्पकार ने कहा कि महामहिम का जन्म पंजाब प्रांत के फरीदकोट जिले के संध्या वान ग्राम में हुआ था उनके पिता का नाम किसान सिंह था जो एक किसान एवं बढ़ई विश्वकर्मा वंशज थे बचपन में ही इनकी माता चल बसी थी जिसके वजह से इनका लालन पालन पोषण इनकी मौसी ने किया जेल सिंह जी शुरू से ही पढ़ाई से ज्यादा लगाव नहीं था महामहिम अपने संघर्षों के कारण हमेशा जेलों में रहते थे जिन के कारण उनका नाम जैल सिंह पड़ गया उनके द्वारा हमेशा अंग्रेजी हुकूमत एवं सामंतवादी ताकतों का हमेशा विरोध किया गया अपने कर्तव्य निष्ठा के चलते पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री देश के गृह मंत्री के साथ-साथ देश के सातवें राष्ट्रपति के रूप में 25 जुलाई 1982 को शपथ लेकर पद को सुशोभित किया उन्होंने अपना पूरा कार्यकाल 25 जुलाई 1987 तक पूरा किया उनके संघर्षों का अनुसरण करते हुए हम लोगों अपने को गौरव शाली समझते हैं और गौरवान्वित होते हैं हम लोगों को आज संकल्प लेना है कि महामहिम के बताए हुए मार्ग पर चलकर देश हित के लिए सदा तत्पर होना होगा और तत्पर रहने का प्रयास किया जाएगा और आने वाली हमारी पीढ़ियां भी सदैव समरण करती रहेगी महामहिम का निधन 25 दिसंबर 1994 को हो गया इसी कार्यक्रम के अवसर पर बेजुबा बंदरों एवं जानवरों को चना खिलाकर उनके भूख को मिटाने का प्रयास किया गया
        कार्यक्रम में सहयोगी एवं उपस्थित साथी गण सर्वश्री कीर्तिमान विश्वकर्मा रूपेश जिला अध्यक्ष वेद प्रकाश राजभर अभिषेक शर्मा मुकेश कुमार मिठाई लाल मौर्य साथ ही साथ  मीडिया  के साथी गण राजेश विश्वकर्मा हथौड़ा सुख लेस प्रधान रमाकांत पांडे एवं वरिष्ठ पत्रकार मन्नूलाल लाल जायसवाल उपस्थित रहे। 

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